ठरकी
Saturday, October 22, 2005
  सेक्स
सेक्स के लिए तड़प रहा था वो। उसका सुपाड़ा जब मोटा हो जाता तो सोचता था कि ऐसा क्यों होता है, सबके होता है क्या? इतना मज़ा क्यों आता है इसमें? किसी ने बताया भी नहीं इसके बारे में। आखिर ये है क्या? कोई बीमारी तो नहीं? लड़कियों के नङ्गे तन को देखने की तो पुरानी आदत थी ही उसे, पर अब उसमें और मज़ा आने लगा था। देखना चाहता था कि लड़कियों की भी चूत में ऐसा ही कुछ होता है क्या, अग़र होता है तो क्या होता है, बहुत उत्सुकता थी। यही गुदगुदी क्या लड़कियों को भी होती है? मुट्ठ मारने में वो माहिर हो गया था, पर जब उसका माल निकल आता था तो तो बहुत गुस्सा आता था उसे। वह चाहता था कि ये कभी खतम ही न हो, बस चलता ही रहे, लगातार। लड़कियों की नङ्गी तस्वीरें देख के उसका लौड़ा खड़ा हो जाता था, इतना मोटा कि छोटी सी निकर में से बाहर निकलने लगता था। सोचता था कोई लड़की मिल जाए तो उसे बोलूँगा कि मेरे लौड़े को बार बार हिलाए और उससे हमेशा सट के ही रहे।
 
Friday, January 14, 2005
  चुदाई
आज के दिन कितनी लड़किया दिखीं मज़ा आ गया। मन करता है देखते ही रहो उनको। नरम नरम मज़ेदार। वाह। कोमल कोमल। यार कपड़े उतार दिया करो धीरे धीरे मज़ा आएगा न फिर तो।
 
Friday, December 10, 2004
  ठरक चढ़ी
ठरक चढ़ी पिक्चर देख के बड़े बड़े मम्मो वाली लड़किया बहनचोद मन कर रहा था मसल दूँ पकड़ के। साली हरामी लाइन देती हैं। पकड़ के अच्छी तरह धो दो इनको साली अपने मम्मे इतने मोटे कैसे कर लेती हैं, इनको दर्द नहीं होता? भारी नहीं लगते क्या? भोसड़ी वाले मादरचोद ठरकी लोग छोड़ेंगे नहीं तुमको। उसके बाद साली रोओगी कि हमें चोद दिया। अबे चूत दी है भगवान ने तो चुदेगी ही। इसमें बहनचोद पिन पिन करने की क्या बात है? हँसी खुशी लेन देन करो और सो जाओ।
 
Friday, April 09, 2004
  भोसड़ी वालो, जागो
लौड़े का चूत से मिलने का जी करता है, लेकिन चोरी चोरी, चुपके से, कस के चुदवाने का मन करता है चूत को, लेकिन ज़बर्दस्ती से। सालो बहन के लौड़ों समझ में आई बात कि नहीं। मोटे लौड़े को पकड़ के हिलाते रहोगे तो कुछ नहीं होने वाला। हाँ लौड़ा चूसने को मिल जाएगा, उस काम में भी मज़ा आता है कि नहीं? किसी हरामी पिल्ली का चूतड़ मिल जाए तो बस कस के निचोड़ ही दोगे तुम लोग तो। तुम लोग साले ठरक के लिए कुछ भी करोगे। ज़िन्दगी और मौत तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं है। यह भगवान ने चीज़ ही ऐसी बनाई है।
 
Sunday, December 14, 2003
  बुर चुदाई
अब तुम्हें बुर चुदाई में ज़्यादा मज़ा आता है तो बुर ढूँढ के चोदो न। ससुर के नाती मेहनत करनी पड़ती है, यूँ हाथ पे लौड़ा धरे बैठे रहोगे तो मुट्ठ ही बजेगी और होगा कुछ नहीं। समझ आई कि नहीं। जाओ जा के चुदाई की मुर्गी ढूँढो। और कस के धर के चोद डालो।
 
Tuesday, November 11, 2003
  लौड़ा महाराज
सालों तुम लोग सोचते हो न कि यह ठरकी लौड़े के पीछे हाथ धोके क्यों पड़ा हुआ है? तो सुन लो बहनचोदों लौड़ा मेरा है और हाथ भी मेरा है तो तुम्हारी गाँड में क्यों खुजली हो रही है? और अग़र हो रही है तो अपने हाथ से करो, मेरी गाँड मत मारो सालो। मरवाओगे मुझे। मुट्ठ मारना एक आनन्द दायक अनुभव है। धरती पर स्वर्ग का अनुभव करना है तो मुट्ठ मारें, मुट्ठ मारे, और मारते जाएँ जब तक सुपाड़ा ठरक ठरक के छोटा न हो जाए। लौड़े को मुँह में ले के दिखाओ, यानी अपने मुँह में, किसी और के में नहीं। साला यह काम हो गया तो ज़िन्दगी में और चाहिए ही क्या? ठरकी क्या चाहे अपने ही मुँह में लौड़ा। सालों मुट्ठ मारते समय जो नसें नीली पड़ जाती हैं, कोई तुम्हारी गर्दन पकड़ के दबाए और हिलाए तो क्या हो? इसलिए लौड़े की इज़्ज़त करना सीखो, उसे रोज़ अच्छी तरह से धोओ, सेवा करो उसकी। लौड़ा है तो जीवन है नहीं तो झाँठ है।
 
Sunday, November 09, 2003
  मुट्ठल महाराज
सालों तुम लोगों को मुट्ठ मार के चैन नहीं मिलता क्या अपने लौड़ों पर नियन्त्रण रखो नहीं तो सालों ठोकोगे क्या? मेरेको मुट्ठ मारनी है मज़े से दो तीन बार अच्छी तरह लग के। बार बार हिला हिला के निकलने के पहले रोकना है उसके बाद जो माल निकलता है, वाह मज़ा आ जाता है। साला इस लौड़े के चारो ओर सारी दुनिया नाचती है, कोई मज़ाक है बहन चोद, पूरी दुनिया मुट्ठल है और सब बोलते हैं मुट्ठ मत मारो, क्यों न मारो सालो लौड़ा खड़ा होता है तो मारेंगे नहीं क्या, तपस्या करें? हद होती है चूतियापे की। खड़े लौड़े का सम्मान करो, बहन को लौड़ों मुट्ठ मारो और ऐश करके सो जाओ।
 
ठरकी

पुरानी ठरक
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