ठरकी
Tuesday, November 11, 2003
  लौड़ा महाराज
सालों तुम लोग सोचते हो न कि यह ठरकी लौड़े के पीछे हाथ धोके क्यों पड़ा हुआ है? तो सुन लो बहनचोदों लौड़ा मेरा है और हाथ भी मेरा है तो तुम्हारी गाँड में क्यों खुजली हो रही है? और अग़र हो रही है तो अपने हाथ से करो, मेरी गाँड मत मारो सालो। मरवाओगे मुझे। मुट्ठ मारना एक आनन्द दायक अनुभव है। धरती पर स्वर्ग का अनुभव करना है तो मुट्ठ मारें, मुट्ठ मारे, और मारते जाएँ जब तक सुपाड़ा ठरक ठरक के छोटा न हो जाए। लौड़े को मुँह में ले के दिखाओ, यानी अपने मुँह में, किसी और के में नहीं। साला यह काम हो गया तो ज़िन्दगी में और चाहिए ही क्या? ठरकी क्या चाहे अपने ही मुँह में लौड़ा। सालों मुट्ठ मारते समय जो नसें नीली पड़ जाती हैं, कोई तुम्हारी गर्दन पकड़ के दबाए और हिलाए तो क्या हो? इसलिए लौड़े की इज़्ज़त करना सीखो, उसे रोज़ अच्छी तरह से धोओ, सेवा करो उसकी। लौड़ा है तो जीवन है नहीं तो झाँठ है।
 
मेरी गाँड मारो:
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