ठरकी
Sunday, November 09, 2003
  मुट्ठल महाराज
सालों तुम लोगों को मुट्ठ मार के चैन नहीं मिलता क्या अपने लौड़ों पर नियन्त्रण रखो नहीं तो सालों ठोकोगे क्या? मेरेको मुट्ठ मारनी है मज़े से दो तीन बार अच्छी तरह लग के। बार बार हिला हिला के निकलने के पहले रोकना है उसके बाद जो माल निकलता है, वाह मज़ा आ जाता है। साला इस लौड़े के चारो ओर सारी दुनिया नाचती है, कोई मज़ाक है बहन चोद, पूरी दुनिया मुट्ठल है और सब बोलते हैं मुट्ठ मत मारो, क्यों न मारो सालो लौड़ा खड़ा होता है तो मारेंगे नहीं क्या, तपस्या करें? हद होती है चूतियापे की। खड़े लौड़े का सम्मान करो, बहन को लौड़ों मुट्ठ मारो और ऐश करके सो जाओ।
 
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